* कल्याणक तीर्थोद्धारक, शासन दिवाकर, पंजाब मार्तण्ड, गच्छाधिपति शांतिदूत जैनाचार्य श्री मद् विजय नित्यानंद सूरि जी म.सा, तप केसरी तपस्वी सम्राट आचार्य भगवन श्री मद् विजय वसंत सूरि जी म.सा आदि ठाणा 09 का 18 मार्च को जंडियाला गुरु में प्रवेश होगा। गोडवाड़ भूषण, ज्ञान प्रभाकर,स्वर्ण संत आचार्य श्रीमद् जयानन्द सूरी जी म.स. (भोले बाबा) जैतपुरा के पास हाथलाई में विराजमान है। दार्शनिक ज्योतिष सम्राट आचार्य श्री मद् विजय यशोभद्र सूरीश्वर जी म.सा आदि ठाणा श्री कावरा (छोटा उदयपुर) में विराजमान है।

Tuesday, 1 May 2018

चंडीगढ़ से माता श्री चक्रेश्वरी देवी जैन तीर्थ तक छरि पालित यात्रा संघ में भाग लेने हेतु आवेदन पत्र

पावन निश्रा :- पंजाब केसरी आचार्य विजय वल्लभ सूरि समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति शांतिदूत आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरि जी महाराज, ज्ञान प्रभाकर भोले बाबा आचार्य विजय जयानंद सूरि जी महाराज, साध्वी श्री प्रगुणा श्री जी महाराज आदि विशाल साधु साध्वी वृन्द

छरी पालित यात्रा संघ 11 जून 2018 से 15 जून 2018

आवेदन करने हेतु नीचे दिए गए Link पर क्लिक करें ...👇

👉 https://goo.gl/forms/n12xVfjtdTC5f9Kt1


Saturday, 24 February 2018

भव्य संक्रांति समारोह

*📝Full News By Vallabh Vatika*🖋🖊
कच्छ के आर्थिक पाटनगर गांधीधाम में
गांधीधाम स्थापना के दिन *भव्य संक्रांति समारोह तथा श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ चोक का लोकार्पण
कच्छ की धन्यधरा पर पंजाब केसरी आचार्य श्रीमद् विजय *वल्लभ सूरि समुदाय* के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् *विजय नित्यानन्द सूरीश्वर जी* म. सा आदि साधु साध्वीवृन्द के पदार्पण से ही धर्म की गंगा प्रवाहित हो रही है।
2 फरवरी को पार्श्व वल्लभ इन्द्र धाम से शाम को विहार करते हुए देशलपुर में गुरु भगवंतों की स्थिरता हेतु नूतन बनने वाले उपाश्रय हेतु भूमि पर वासक्षेप डाल कर गुरुदेव ने मंगल पाठ सुनाया ओर आशीर्वाद दिया। रात्रि स्थिरता *सामत्रा गांव* में किया। 11 वर्ष पहले यहां पर श्री कुंथुनाथ भगवान की प्रतिष्ठा गच्छाधिपति गुरुदेव ने ही सम्पन्न की थी। 3 फरवरी को *मानकुवा गांव में अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव* निमित्त भव्य प्रवेश हुआ । 7 फरवरी को ऐतिहासिक रूप से प्रभु प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई और शाम को गुरुदेव विहार कर भुज में पधारे। अनेक गुरुभक्तों के घर पर चरण डालते हुए गुरुदेव वल्लभ विविध लक्षी संकुल में पधारे जहां पर बहुत बड़ी संख्या में भाविक लोग प्रवचन श्रवण हेतु उपस्थित थे । रात्रि 11 बजे तक प्रवचन* की अमिधारा में सभी ने आत्म स्नान किया। गुरुदेव ने सभी को गुरु वल्लभ के साधर्मिक उत्थान और संस्कार मुलक शिक्षण के क्षेत्र में कुछ ठोस कार्य करने हेतु प्रेरित किया। अगले दिन 8 फरवरी को सुबह भुज से विहार किया।
भुज से 8 फरवरी को सुबह विहार करते हुए गुरुदेव के हृदय में कच्छ के सुप्रसिद्ध *श्री भद्रेश्वर महातीर्थ* की यात्रा करने का प्रबल भाव था। किंतु विहार यात्रा में कुछ किलोमीटर ओर बढ़ रहे थे। आखिर निर्णय हुआ कि भले विहार थोड़ा अधिक होगा परंतु भद्रेश्वर होकर ही गांधीधाम जाएंगे। 
8 फरवरी को भुज से विहार करते हुए गुरुदेव सबसे पहले *माधापर संघ* में पधारे। संघ ने भव्य प्रवेश करवाया और प्रवचन लाभ लिया। वहां से गुरुदेव *वर्धमान नगर भुजोडी* पधारे। वहां पर भी भव्य प्रवेश हुआ।
वहां विराजित अंचलगच्छ के मुनि श्री कंचनसागर जी म. सा ओर स्थानकवासी परंपरा की महासती जी ने गुरुदेव के दर्शन वन्दन किये। वहां पर *श्री विमलनाथ भगवान* के जिनालय परिसर में ही *चार नूतन देहरिओं के साथ की भूमि पर स्नात्र हाल, *श्री घण्टाकर्ण देव मन्दिर* के *भूमिपूजन-खात* विधान हुए। जिनमंदिर के सामने की विशाल भूमि पर *श्री आत्म-वल्लभ जैन आराधना भवन* का भूमिपूजन-खात मुहूर्त सम्पन्न हुआ। बाद में धर्मसभा हुई।
9 फरवरी को सुबह वहां से विहार कर गुरुदेव भुज- भचाऊ मुख्य मार्ग पर *सिटी स्क्वायर टाउनशिप* में निर्मित तीर्थ *संकुल* में पधारे। वहां भी भव्य स्वागत सामैया हुआ। वहां पर 11 वर्ष पूर्व पूज्य गच्छाधिपति जी की निश्रा में भूमिपूजन हुआ था और कुछ ही वर्षों में तीर्थ निर्माण पूर्ण हुआ । जिसमें जिनालय, *श्री घण्टाकर्ण वीर देव* और कच्छ वागड़ के अनंत उपकारी आ.श्रीमद् *विजय कलापूर्ण सूरि जी* म.सा के गुरूमन्दिर की प्रतिष्ठा सम्पन्न हो चुकी है।


गुरु वल्लभ के गुरूमन्दिर की प्रतिष्ठा हेतु गुरुदेव का इंतजार था तो आज चतुर्विध श्रीसंघ की उपस्थिति में *गुरु वल्लभ की मूर्ति की भव्य प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई।* वहां से दोपहर में विहार कर गुरुदेव भद्रेश्वर तीर्थ की ओर बढ़े।
10 फरवरी को सुबह *भद्रेश्वर जी पहुंचें* तो वहां भी स्वागत सामैया हुआ। परम गुरुभक्त श्री नवीन भाई लालन एक बस लेकर पधारे हुए थे। उन्होंने गुरुदेव के सान्निध्य में यहां *श्री पार्श्वनाथ पंच कल्याणक पूजा* का आयोजन किया। तीर्थ दर्शन कर सभी को खूब आनंद की अनुभूति हुई।
*ज्ञात रहे यहां पर प्रभु पार्श्व के समय श्री कपिल केवली ने प्रभु पार्श्व की जिस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की थी वो इस तीर्थ में अभी भी विराजमान है। मूलनायक श्री महावीर स्वामी भगवान की भी प्रभाविक प्रतिमा है। 2001 में आये भूकम्प के 4 वर्ष बाद सम्पूर्ण जिनमंदिर नया बनाया गया। पुराना जिनमंदिर जो कि भूकम्प से क्षतिग्रस्त हुआ था उसको उतारते समय जमीन में से सैकड़ों खंडित प्रतिमाएं प्राप्त हुई जो कि कभी मुसलमानी आक्रमण के शिकार हुई थी। गौरवशाली जैन युग की उन हजारों वर्ष प्राचीन खंडित प्रतिमाओं के दर्शन कर मन व्यथित सा हुआ। फिर गुरुदेव यहां के सेठ जगड़ूशाह के पुराने सात मंजिला महल को देखने गए जो कि भूमि में दब चुका था और खंडहर ही शेष है।*
वहां से शाम को विहार करके अगले दिन सुबह *आदिपुर गांव* में पहुंचें। जहां पर *माकपट उद्धारिका साध्वी समता श्री जी म.सा* प्रवर्तिनी साध्वी जगत श्री जी म.सा प्रवर्तिनी साध्वी हेमलता श्री जी म.सा तथा साध्वी हितप्रज्ञाश्री जी म.का सांसारिक परिवार रहता है। भले ये जाति से आहिर हैं किंतु कर्मणा तो पक्के जैन हैं। *उन्होंने बताया कि खेती के समय हम साध्वी समता श्री जी का नाम लेकर एक नारियल चढ़ाते हैं तो हमारी फसल को कीड़ा नही लगता। हमे कीटनाशक नही छिड़कना पड़ता । इतनी कृपा हम पर गुरु वल्लभ ओर साध्वी जी की है।*
वहां से गुरुदेव *नाकोड़ा सोसाइटी* में पधारे। संघ ने स्वागत किया, प्रवचन हुआ। संघ ने कहा कि भूकम्प के समय जिनके घर पूरे टूट गए उन सभी के लिए ये नगर बसाया गया। वहां से गुरुदेव गांधीधाम के *ओसलो* क्षेत्र में पधारे ओर रात्रि स्थिरता की।
12 फरवरी को सुबह सकल संघ गुरुदेव के नगर प्रवेश के लिए तैयार था। खूब भावोल्लास पूर्वक प्रवेश सम्पन्न हुआ। सकल संघ ने नवकारसी की। बाद में *गच्छाधिपति गुरुदेव की प्रेरणा से निर्मित मंगल कलश, अष्ट मंगल और जैन चिन्ह युक्त चोक का चतुर्विध श्रीसंघ के साथ गुरुदेव की निश्रा में श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ चोक के नाम के रूप में लोकार्पण हुआ।* लोकार्पण विधि *महापौर श्रीमती मालती बेन माहेश्वरी ओर उपमेयर श्रीमती गीता बेन गणत्रा, श्री कान जी भाई भार्या के करकमलों से सम्पन्न करवाई गई।*
वहां से सभी संक्रांति समारोह स्थल के विशाल मण्डप में पहुंचें। गुरु वल्लभ ओर गुरु नित्यानन्द के बेनरों से मण्डप को सजाया गया था। गुरुवंदन ओर मंगलाचरण से समारोह का शुभारंभ हुआ। प्रातः कालीन दोनो संक्रांति भजन लुधियाना जैन *संक्रांति मण्डल के संस्थापक प्रधान श्री प्रवीण जैन* ने गाए। इस अवसर पर गुजरात के *मंत्री श्री वासन भाई आहीर, सांसद श्री विनोद भाई चावड़ा, BJP के जिलाध्यक्ष श्री केशुभाई पटेल, कच्छ जिला पंचायत प्रमुख श्रीमती कौशल्या बेन माधापरिया भुज की विधायक श्रीमती नीमा बेन आचार्य* आदि अनेक राजनीतिक अधिकारी भी उपस्थित हुए।
यहां के सातों संघों के संयुक्त संगठन बृहद गांधीधाम जैन समाज के प्रमुख श्री चंपा लाल जी पारेख ने गुरु भगवंतों व सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में गुरुदेव का आशीष प्राप्त करने हेतु अंचलगच्छ के अग्रणी श्री मितेश भाई धर्मशी
खरतरगच्छ के श्री घेवरचंद जी नाहटा, स्थानकवासी समाज के श्री भीखचन्द जी श्री अमर चन्द जी, श्री रोहित भाई शाह, तेरापंथ समाज के श्री नरेन्द्र भाई संघवी भी उपस्थित थे।
तपगच्छ जैन संघ द्वारा आयोजित इस समारोह में भुज ओर अन्य क्षेत्रों से 6 बसें व कई गाड़िएं भरकर पहुंचीं। देशभर से भी बड़ी संख्या में गुरूभक्तगण पहुंचें। महिला मंडल व संगीतकार के भजनों से महोल भक्तिमय हुआ। सभी के बहुमान किये गए। *मंत्री महोदय ने गुजराती, मारवाड़ी, इंग्लिश ओर हिंदी सभी भाषाओं में अपना वक्तव्य दिया और कहा जैन धर्म और सन्तों के तप त्याग से ही जगत का उद्धार हो रहा है।*
मुनि श्री मोक्षानंद विजय जी म.सा तथा गच्छाधिपति गुरुदेव के प्रवचन का रसपान करते हुए जनसमूह समय का भी भान भूल गया। 12 बजे से पहले ही जनता उठ उठ निकलने लगती है किंतु स्थानीय लोगों तो अति आश्चर्य हुआ कि जब संक्रांति कार्यक्रम में दोपहर 3 बजे तक किसी ने उठने का नाम नही लिया।
*शासन सुरभि तथा श्रावकरत्न पदवी से किया अलंकृत*
कच्छ जैसे दूरगामी क्षेत्र में जैन शासन की प्रभावना करने वाली पंजाब केसरी आचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरि समुदाय की पुण्यमूर्ति, माकपट उद्धारिका साध्वी समता - जगत - हेमलता श्री जी म.की शिष्या *व्यवहारदक्षा, कार्य कुशला साध्वी प्रज्ञलताश्री जी म.सा* को गच्छाधिपति आ.श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म.सा ने गांधीधाम में संक्रांति की विशाल सभा मे *शासन सुरभि* के पद से अलंकृत किया।
साथ ही श्री पार्श्व वल्लभ इन्द्र धाम के प्रमुख, सूझ बूझ के धनी, धैर्य और श्रम की मूर्ति, *माकपट समाज के गौरव श्री वीरसेन भाई को श्रावकरत्न पद से अलंकृत किया।* सकल चतुर्विध श्रीसंघ ने गुरुदेव द्वारा प्रदत्त इस शुभ अलंकरण घोषणा का अनुमोदन किया। गांधीधाम जैन संघ, माकपट जैन समाज, पंजाब के गुरुभक्तों की ओर से श्रावकरत्न श्री वीरसेन भाई का सम्मान किया गया और गच्छाधिपति जी ने साध्वी जी को काम्बली प्रेषित की।
गुरुदेव की ओर से *मुनि श्री मोक्षानंद विजय जी* ने कहा कि गांधीधाम में इस वर्ष सामूहिक वर्षीतप की आराधना हो इस पर संघ विचार करे । संघ ने भी गुरुदेव की इस भावना को पूरा करने का आश्वासन दिया।
संक्रांति की अविस्मरणीय छाप सभी के हृदय पर अंकित हो गयी। गुरु वल्लभ के जीवन से सभी प्रभावित हुए। अंत मे संक्रांति स्तोत्र हुए और संक्रांति नाम का प्रकाश किया गया।
शाम को गुरुदेव ने गांधीधाम से राजस्थान हेतु विहार किया।

संक्रांति नाम


पंजाब  केसरी आचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरि जी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति शांतिदूत जैनाचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरि जी महाराज साहिब के मुखारविंद से....


Sunday, 28 May 2017

*आचार्य पदवी प्रदान रत्नत्रयी महोत्सव*

_द्वितीय दिवस : 28 मई 2017_
शांतिदूत गच्छनायक आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी आदि श्रमण श्रमणी वृन्द की निश्रा में *गुरुदेव श्रीजी के प्रथम शिष्य तत्त्वचिंतक पंन्यासप्रवर श्री चिदानंद विजय जी म.* की आचार्य पदवी निमित्त श्री विजय वल्लभ साधना केंद्र, जेतपुरा (राज.) में रत्नत्रयी त्रिदिवसीय महोत्सव के अंतर्गत आज
प्रातः काल मूलनायक श्री सम्भवनाथ परमात्मा का भव्य केसर अभिषेक आयोजित हुआ। प्रभुभक्ति में संलग्न होकर श्रावक श्राविकाओं ने अपनी प्रसन्नता अभिव्यक्त की।
दोपहर में गणधर श्री जी गौतम स्वामी महापूजन का आयोजन किया गया। विधिकारक श्री कल्पेश भाई ने भक्तियोग में सभी को भाव विभोर करते हुए सूरिमंत्र में विशेष साध्य - श्री गौतम स्वामी जी की महिमा का वर्णन किया।
शाम को मेहंदी का कार्यक्रम हुआ। श्राविका वर्ग ने प्रभु भक्ति, गुरुभक्ति का अपूर्व रंग जमाते हुए संध्या को यादगार शाम में परिवर्तित हो गया। सभी के पुरजोर आग्रह से गच्छाधिपति गुरुदेव और पंन्यास गुरुदेव मांगलिक देने हेतु पधारे। सभी जनों के मार्मिक शब्दों से समां भावुक हो गया। पंन्यास जी ने आंखे झुकाकर मौनपूर्वक समभाव से सभी के अभिवादन को स्वीकार किया।
शिवपुरी, दिल्ली, लुधियाना, जयपुर, अम्बाला, मुम्बई, फालना, रानी, खौड़, पाली आदि अनेक शहरों से गुरुभक्त पधारे। पंन्यासप्रवर श्री चिदानंद विजय जी के आचार्य पदवी पर आरूढ़ होने से भक्तों में अत्यंत हर्षोल्लास था।
कल सुबह 8:30 बजे से सुविशाल जनमेदिनी की साक्षी में आचार्य पदवी प्रदान का ऐतिहासिक महोत्सव आयोजित होगा।
*आचार्य पदवी प्रदान विधि-आचार के अंतर्गत विशेष बातें*
• वडील गुरुभगवंत नूतन आचार्य को महाप्रभावक _सूरिमंत्र_ प्रदान करते हैं जिसकी साधना नूतन आचार्य भगवंत करते हैं
• इस अवसर पर 700 गाथायुक्त श्री नंदिसूत्र आगम का सम्पूर्ण वांचन वडील गुरुभगवंत अपने श्रीमुख से करते हैं।
• परंपरा अनुसार आचार्य पदवी देने वाले वडील गुरु भगवंत भी नूतन आचार्य को वन्दन करते हैं।
।। णमो आयरियाणं ।।

Sunday, 21 May 2017

*🙏 भावभरा आमंत्रण 🙏*


*_आसक्ति से अनासक्ति की ओर_*
*_संसार से संन्यास की ओर"_*
*_राग से विराग की ओर_*
*_संस्कृति से प्रकृति की ओर_*


श्री विजय वल्लभ सूरि जी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी के आज्ञानुवर्ती
*जैनसाइट प्रणेता मुनि श्री भाग्यचंद्र विजय जी आदि ठाणा 2 एवं साध्वी शीलधर्मा श्री जी आदि ठाणा 4*
की शुभ निश्रा में दिनांक 27 मई 2017 को धर्म नगरी चेन्नई में वेपेरी मध्य गौतम किरण में आनंद (गुजरात) निवासी
*_मुमुक्षु अखिलकुमार जैन की दीक्षा_* प्रसंगे
*🙏भावभरा आमंत्रण🙏*
_दीक्षा धर्म नो जयजयकार_
_दीक्षार्थी नो जयजयकार_

Wednesday, 5 April 2017

 तपागच्छीय श्री वल्लभ सूरि जी समुदाय के समर्थ गच्छनायक आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी की आज्ञानुवर्तिनी विदुषी साध्वी चंद्रयशा श्री जी म. एवं साध्वी पुनीतयशा श्री जी म. आदि ठाणा 2

की पुण्य प्रभावक निश्रा में चैत्रमास की श्री नवपद जी की ओली की आराधना श्री कम्पिलपुरी तीर्थ (उत्तर प्रदेश) में  मनाई जा रही है।

विशेष : तेरहवें तीर्थंकर श्री विमलनाथ जी के च्यवन, जन्म, दीक्षा एवं केवलज्ञान - ये 4 कल्याणक कम्पिलपुरी नगरी में हुए थे। चक्रवर्ती हरिषेण एवं चक्रवर्ती ब्रह्मदत्त भी यहीं उत्पन्न हुए थे। ऐतिहासिक दृष्टि से कम्पिल्यपुरी का बहुत महत्त्व है। यहाँ से अनेक प्राचीन प्रतिमाएं, प्रागैतिहासिक शिलालेख आदि प्राप्त होते रहते हैं।


आज सरलमना साध्वी चन्द्रयशा जी महाराज साहिब का जन्मदिवस भी है। साध्वी जी को वल्लभ वाटिका की तरफ से जन्मदिवस की बधाई देते हुए शासन देव से प्रार्थना करते है कि वह इसी प्रकार जिनशासन के कार्यों को करते रहे।

Monday, 3 April 2017

गुरु आत्म की दो पाट परम्परा के पूज्यों का अविस्मरणीय मिलन

 औरंगाबाद की धन्यधरा पर गुरु आत्म कमल लब्धि विक्रम परम्परा को समर्पित  आ.भ.श्रीमद् विजय यशोवर्म सूरि जी म.आदि ठाणा -32 तथा
गुरु आत्म वल्लभ समुद्र इंद्रदिन्न के क्रमिक पट्टधर, गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छनायक आ.भ.श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म. आदि ठाणा-11 का 1 अप्रैल 2017 को सुबह 7:30बजे निराला बाजार से प्रवेश प्रारम्भ हुआ।
श्री गोड़ी जी पार्श्वनाथ जिनमंदिर में चतुर्विध श्रीसंघ ने दर्शन वन्दन किये। सामूहिक भक्तामर तथा शक्रस्तव का पाठ हुआ। साधारण भवन में मंगल प्रवचन हुआ।
 मुनि श्री मोक्षानन्द विजय जी म.सा ने फ़रमाया कि भले हम पीली और सफेद चादर में दिखाई दे रहे हैं, किंतु हमारी गुरु परम्परा एक है। हम गुरु आत्म के परिवार के सदस्य हैं। धाराएं दो हैं किंतु मूल एक है।

गुरु आत्म के बाद उनके परिवार में समय समय पर कई समुदाय बने, परंतु सभी की आत्मा गुरु आत्म है।

एक वृक्ष की अनेक शाखाएं हैं और सभी मूल से ही जुडी होती हैं । मूल पर एक का अधिकार कभी किसी का नही हुआ न ही हो सकता है।
 आ.श्री यशोवर्म सूरि जी म.सा ने फ़रमाया कि हमारी गुरु परंपरा एक है, आज समय एक होने का है। भ. महावीर के परिवार में सभी सम्प्रदाय अपनी अपनी परंपरा में रह कर महावीर के पथ पर चलें न कि दूसरों के राह में पत्थर फेंक कर अपनी तुच्छ मनोवृत्ति प्रस्तुत करें।

ग. आ. श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरि जी म.सा ने फ़रमाया कि आज पूज्य श्री का 52 वर्षों बाद और मेरा 30 वर्षों बाद औरंगाबाद आना हुआ है । गत वर्ष पालीताना के श्रमण सम्मेलन में हमारा मिलना हुआ । आज पुनः एक वर्ष बाद यहां मिले । प्रभु महावीर के मार्ग पर वोही चल सकता है जो दूसरों को साथ लेकर चल सकता है। मात्र अपने सम्प्रदाय, गच्छ या समुदाय के लिए जीने वाले कभी महावीर के मार्ग को पा नही सकते।

 संघ की और से काम्बली ओढ़ाई गयी।

चारों सम्प्रदाओं के पदाधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे और प्रभु महावीर जन्म कल्याणक की निमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया।

बाल मुनि श्री मोक्षेश विजय जी म. सा के दीक्षा पश्चात प्रथम बार अपने सांसारिक माता पिता के घर पधारने का प्रसंग भी था तो उनकी और से भी सकल संघ को शाम को वालुज की और उनके निवास स्थान पर आने की विनती की गई।

इस अवसर पर अम्बाला, हैदराबाद, पुणे, मुम्बई, ठाणा, सूरत, जालना से संघों संस्थाओं के पदाधिकारी तथा गुरु भक्त बड़ी संख्या में पधारे हुए थे ।

सकल संघ के अल्पाहार का लाभ गुरुभक्त चैंपियन परिवार ने लिया। जिन्होंने 30 वर्ष पहले गुरु इंद्र की निश्रा में अंतरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ का ऐतिहासिक छ री पालित यात्रा संघ निकाला था।                        

Friday, 31 March 2017

गुरु आत्म के पाट परंपरा की दो धाराओं का एक साथ प्रवेश

गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छनायक एवं आ.श्री लब्धि सूरि समुदाय के प्रभावक आचार्य भगवंतों का औरंगाबाद में होगा एक साथ प्रवेश

🎺🎷🎺🎷🎺🎷🎺🎷🎺🎷🎺

1 अप्रैल शनिवार को औरंगाबाद में गुरु आत्म की दो पाट परंपरा के प्रभावक आचार्य भगवंतों का एक साथ मंगल प्रवेश का दृश्य संयोजित होने जा रहा है।

श्री आत्म कमल लब्धि विक्रम पाट परंपरा के शासन प्रभावक परम पूज्य आ.भ. श्रीमद् विजय यशोवर्म सूरि जी म.सा आदि श्रमण - श्रमणी ठाणा - 32 एवं

भ. श्री महावीर स्वामी के 77वें व श्री आत्म वल्लभ समुद्र इंद्र पाट परंपरा* के क्रमिक पट्टधर, गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छाधिपति शांतिदूत आ.भ.श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म.सा. आदि ठाणा का औरंगाबाद नगर में एक साथ प्रवेश होगा।

गुरु आत्म की इन दो पाट परंपरा के प्रभावक पूज्यों के एक साथ प्रवेश की तैयारियों में औरंगाबाद संघ दिलो जान से जुटा हुआ है।

आ.श्री यशोवर्म सूरि जी म.सा मालेगांव की और से विहार करते हुए तथा ग. आ.श्री नित्यानंद सूरि जी म. सा आदि श्रमण श्रमणी ठाणा - 11 हैदराबाद की और से विहार करते हुए 1 अप्रैल को औरंगाबाद पहुँच रहें हैं।

ज्ञात रहे कि गुरु आत्म के कालधर्म के पश्चात् अनेक पाट परंपरा प्रचलित हुई और सभी अपने मूल आत्माराम जी से जुड़ कर गुरु परंपरा का निर्वाह कर शासन की प्रभावना कर रहे हैं।

पालीताना आयोजित तपागच्छिय श्रमण सम्मेलन के बाद यहां पर एक वर्ष के बाद दोनों धाराओं का प्रेमपूर्ण मिलन होगा।

सब का मूल एक है।
सबकी आत्मा आत्म है।

Wednesday, 29 March 2017

प्रथम बार महाराष्ट्र के वाहे गांव में जैन संतों का हुआ आगमन

सम्पूर्ण देश में विचरण कर जिनशासन की अपूर्व सेवा और प्रभावना करने वाले भगवान महावीर की अक्षुण्ण पाट परंपरा के 77वें पट्टधर, पंजाब केसरी गुरु वल्लभ के समुदाय के वर्तमान गच्छनायक शांतिदूत आचार्य देव श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म.साआदि श्रमण श्रमणी वृन्द महाराष्ट्र में औरंगाबाद की और विहार में आगे बढ़ रहे हैं। 28 मार्च को गुरुदेव वाहे गाँव पधारे। गच्छनायक गुरुदेव के शिष्य मुनि श्री मोक्षानंद विजय जी म. के शिष्य बालमुनि श्री मोक्षेश विजय जी म. का ये सांसारिक पैतृक गांव हैं। इस गाँव में आज तक किसी जैन संतों का पधारना नही हुआ।
 किंतु आज गांववासी उस बालमुनि को देखने के लिए उत्सुक थे जिसका सम्बन्ध इस भूमि से जुड़ा हुआ था। बालमुनि और उनके सांसारिक पारिवारिकजन भी अत्यंत हर्षित थे क्योंकि गुड़ी पड़वा यानि नव वर्ष के दिन अपने दादा गुरु जी, गुरु जी और अन्य साधु साध्वीवृन्द सहित दीक्षा के बाद प्रथम बार पैतृक गांव में पधारना हो रहा था।
गाँव में रहने वाले सभी धर्म जाति के लोग जैन संतों को निहारने और स्वागत करने के लिए सुबह से ही अपलक पांवड़े बिछा कर प्रतीक्षा कर रहे थे।
गुरुदेव ने कहा कि धन्य हुआ ये गांव और यहां की भूमि जहाँ पर आज संत पधारे हैं। जहां संतो ने चरण न पड़ें वो स्थान श्मशान के समान हैं और जिस भूमि पर संत पधारें वो भूमि पवित्र तीर्थ बन जाती है।
गुरुदेव ने गांव वासियों को शाकाहार अपनाने और मद्यपान, व्यसन आदि त्याग करने की प्रेरणा दी। गुरुदेव ने कहा कि बालमुनि का अपने सांसारिक पैतृक गांव में अनायास आगमन एक संयोग ही है। परिवारिकजनों ने पारंपरिक रीति से संतों का स्वागत किया और काम्बली ओढ़ाई। पगलिया करवाया।

Saturday, 25 March 2017

वल्लभ वाटिका बुलेटिन

🔆 वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी आदि ठाणा 7 एवं साध्वी पूर्णप्रज्ञा श्री जी आदि ठाणा 4 दिनांक 1 अप्रैल 2017 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में विराजमान रहेंगे।

🔆 तपसूर्य आचार्य विजय वसंत सूरीश्वर जी आदि ठाणा 2 विजय वल्लभ स्मारक, दिल्ली में विराजमान हैं। गुरुदेव के अखण्ड 49वें वर्षीतप का पारणा अक्षय तृतीया 29 अप्रैल 2017 को हस्तिनापुर की भूमि पर होगा।

🔆 ज्योतिष विशारद आचार्य विजय यशोभद्र सूरीश्वर जी आदि ठाणा 2 गुजरात में अहमदाबाद से मेहसाणा की ओर विहार में हैं।

🔆 ज्ञानप्रभाकर आचार्य विजय जयानंद सूरीश्वर जी आदि ठाणा 3 बीकानेर क्षेत्र में विराजमान हैं। कल गुरुदेव का भव्य नगर प्रवेश बीकानेर में होगा। मुनि जयकीर्ति विजय जी की जन्मभूमि भी बीकानेर ही है।

🔆 पंन्यास चिदानंद विजय जी, मुनि लक्ष्मीचंद्र विजय जी आदि ठाणा ध्यान साधना के उद्देश्य से आचार्य विजय जनकचन्द्र सूरि जी की कालधर्म भूमि - ईडर (गुजरात) में विराजमान हैं।

🔆 कार्यदक्ष गणि राजेंद्र विजय जी, मुनि धरणेन्द्र विजय जी आदि ठाणा गुरु वल्लभ जन्मभूमि - बड़ौदा (गुजरात) में विराजमान हैं।

🔆 हस्तरेखा-ज्ञाता पंन्यास धर्मशील विजय जी, मुनिराज रविंद्र विजय जी आदि ठाणा 3 की निश्रा में ओली की आराधना बोडेली (गुजरात) में करवाई जाएगी।

🔆 जैनसाइटप्रणेता मुनि भाग्यचंद्र विजय जी आदि ठाणा 2 एवं साध्वी शीलधर्मा श्री जी आदि ठाणा 4 की निश्रा में चेन्नई के समीपवर्ती आत्म वल्लभ नगर, नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ, तन्डलम में 3 से 11 अप्रैल 2017 को चैत्र मास की नवपद ओली की आराधना करवाई जाएगी।

🔆 संयम स्थविरा साध्वी देवेंद्र श्री जी, साध्वी शासनज्योति श्री जी आदि ठाणा मेवाड़ क्षेत्र के अंटाली तीर्थ में आचार्य पुण्यरत्न सूरीश्वर जी के सानिध्य में होने जा रहे प्रतिष्ठा महोत्सव में उपस्थित रहेंगी। 15 दिन महोत्सव पूर्वक 20 अप्रैल 2017 को यह प्रतिष्ठा संपन्न होगी।

🔆 शासनरत्ना साध्वी प्रगुणा श्री जी, साध्वी प्रियधर्मा श्रीजी आदि ठाणा 4 बड़ौत क्षेत्र में धर्मस्पर्शना करते हुए कल्याणक भूमि - श्री हस्तिनापुर महातीर्थ पधारे हैं एवं यहाँ स्थिरता करेंगे।

🔆 सरल स्वभावी साध्वी चन्दनबाला श्री जी, साध्वी धर्मरत्ना श्री जी आदि ठाणा बोडेली से विहार कर भगवानपुरा आदि क्षेत्रों की स्पर्शना करते हुए पिपारिया (जिला बड़ौदा) गुजरात पधारे एवं कुछ दिन की स्थिरता करेंगे।

🔆 सरल स्वभावी साध्वी यशोभद्रा श्री जी, साध्वी प्रीतिदर्शिता श्री जी आदि ठाणा पटियाला (पंजाब) में विराजमान हैं। साध्वीद्वय का आगामी चातुर्मास होशियारपुर में होगा।

🔆 विदुषी साध्वी चंद्रयशा श्री जी, साध्वी पुनीतयशा श्री जी आदि ठाणा श्री विमलनाथ जी की कल्याणक भूमि - कम्पिलपुरी (उत्तर प्रदेश) में विराजमान हैं एवं साध्वी जी की निश्रा में आगामी माह शाश्वती नवपद ओली की भव्य आराधना भी करवाई जाएगी।