* कल्याणक तीर्थोद्धारक, शासन दिवाकर, पंजाब मार्तण्ड, गच्छाधिपति शांतिदूत जैनाचार्य श्री मद् विजय नित्यानंद सूरि जी म.सा, तप केसरी तपस्वी सम्राट आचार्य भगवन श्री मद् विजय वसंत सूरि जी म.सा आदि ठाणा 09 का 18 मार्च को जंडियाला गुरु में प्रवेश होगा। गोडवाड़ भूषण, ज्ञान प्रभाकर,स्वर्ण संत आचार्य श्रीमद् जयानन्द सूरी जी म.स. (भोले बाबा) जैतपुरा के पास हाथलाई में विराजमान है। दार्शनिक ज्योतिष सम्राट आचार्य श्री मद् विजय यशोभद्र सूरीश्वर जी म.सा आदि ठाणा श्री कावरा (छोटा उदयपुर) में विराजमान है।

Sunday, 28 May 2017

*आचार्य पदवी प्रदान रत्नत्रयी महोत्सव*

_द्वितीय दिवस : 28 मई 2017_
शांतिदूत गच्छनायक आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी आदि श्रमण श्रमणी वृन्द की निश्रा में *गुरुदेव श्रीजी के प्रथम शिष्य तत्त्वचिंतक पंन्यासप्रवर श्री चिदानंद विजय जी म.* की आचार्य पदवी निमित्त श्री विजय वल्लभ साधना केंद्र, जेतपुरा (राज.) में रत्नत्रयी त्रिदिवसीय महोत्सव के अंतर्गत आज
प्रातः काल मूलनायक श्री सम्भवनाथ परमात्मा का भव्य केसर अभिषेक आयोजित हुआ। प्रभुभक्ति में संलग्न होकर श्रावक श्राविकाओं ने अपनी प्रसन्नता अभिव्यक्त की।
दोपहर में गणधर श्री जी गौतम स्वामी महापूजन का आयोजन किया गया। विधिकारक श्री कल्पेश भाई ने भक्तियोग में सभी को भाव विभोर करते हुए सूरिमंत्र में विशेष साध्य - श्री गौतम स्वामी जी की महिमा का वर्णन किया।
शाम को मेहंदी का कार्यक्रम हुआ। श्राविका वर्ग ने प्रभु भक्ति, गुरुभक्ति का अपूर्व रंग जमाते हुए संध्या को यादगार शाम में परिवर्तित हो गया। सभी के पुरजोर आग्रह से गच्छाधिपति गुरुदेव और पंन्यास गुरुदेव मांगलिक देने हेतु पधारे। सभी जनों के मार्मिक शब्दों से समां भावुक हो गया। पंन्यास जी ने आंखे झुकाकर मौनपूर्वक समभाव से सभी के अभिवादन को स्वीकार किया।
शिवपुरी, दिल्ली, लुधियाना, जयपुर, अम्बाला, मुम्बई, फालना, रानी, खौड़, पाली आदि अनेक शहरों से गुरुभक्त पधारे। पंन्यासप्रवर श्री चिदानंद विजय जी के आचार्य पदवी पर आरूढ़ होने से भक्तों में अत्यंत हर्षोल्लास था।
कल सुबह 8:30 बजे से सुविशाल जनमेदिनी की साक्षी में आचार्य पदवी प्रदान का ऐतिहासिक महोत्सव आयोजित होगा।
*आचार्य पदवी प्रदान विधि-आचार के अंतर्गत विशेष बातें*
• वडील गुरुभगवंत नूतन आचार्य को महाप्रभावक _सूरिमंत्र_ प्रदान करते हैं जिसकी साधना नूतन आचार्य भगवंत करते हैं
• इस अवसर पर 700 गाथायुक्त श्री नंदिसूत्र आगम का सम्पूर्ण वांचन वडील गुरुभगवंत अपने श्रीमुख से करते हैं।
• परंपरा अनुसार आचार्य पदवी देने वाले वडील गुरु भगवंत भी नूतन आचार्य को वन्दन करते हैं।
।। णमो आयरियाणं ।।

Sunday, 21 May 2017

*🙏 भावभरा आमंत्रण 🙏*


*_आसक्ति से अनासक्ति की ओर_*
*_संसार से संन्यास की ओर"_*
*_राग से विराग की ओर_*
*_संस्कृति से प्रकृति की ओर_*


श्री विजय वल्लभ सूरि जी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी के आज्ञानुवर्ती
*जैनसाइट प्रणेता मुनि श्री भाग्यचंद्र विजय जी आदि ठाणा 2 एवं साध्वी शीलधर्मा श्री जी आदि ठाणा 4*
की शुभ निश्रा में दिनांक 27 मई 2017 को धर्म नगरी चेन्नई में वेपेरी मध्य गौतम किरण में आनंद (गुजरात) निवासी
*_मुमुक्षु अखिलकुमार जैन की दीक्षा_* प्रसंगे
*🙏भावभरा आमंत्रण🙏*
_दीक्षा धर्म नो जयजयकार_
_दीक्षार्थी नो जयजयकार_

Wednesday, 5 April 2017

 तपागच्छीय श्री वल्लभ सूरि जी समुदाय के समर्थ गच्छनायक आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी की आज्ञानुवर्तिनी विदुषी साध्वी चंद्रयशा श्री जी म. एवं साध्वी पुनीतयशा श्री जी म. आदि ठाणा 2

की पुण्य प्रभावक निश्रा में चैत्रमास की श्री नवपद जी की ओली की आराधना श्री कम्पिलपुरी तीर्थ (उत्तर प्रदेश) में  मनाई जा रही है।

विशेष : तेरहवें तीर्थंकर श्री विमलनाथ जी के च्यवन, जन्म, दीक्षा एवं केवलज्ञान - ये 4 कल्याणक कम्पिलपुरी नगरी में हुए थे। चक्रवर्ती हरिषेण एवं चक्रवर्ती ब्रह्मदत्त भी यहीं उत्पन्न हुए थे। ऐतिहासिक दृष्टि से कम्पिल्यपुरी का बहुत महत्त्व है। यहाँ से अनेक प्राचीन प्रतिमाएं, प्रागैतिहासिक शिलालेख आदि प्राप्त होते रहते हैं।


आज सरलमना साध्वी चन्द्रयशा जी महाराज साहिब का जन्मदिवस भी है। साध्वी जी को वल्लभ वाटिका की तरफ से जन्मदिवस की बधाई देते हुए शासन देव से प्रार्थना करते है कि वह इसी प्रकार जिनशासन के कार्यों को करते रहे।

Monday, 3 April 2017

गुरु आत्म की दो पाट परम्परा के पूज्यों का अविस्मरणीय मिलन

 औरंगाबाद की धन्यधरा पर गुरु आत्म कमल लब्धि विक्रम परम्परा को समर्पित  आ.भ.श्रीमद् विजय यशोवर्म सूरि जी म.आदि ठाणा -32 तथा
गुरु आत्म वल्लभ समुद्र इंद्रदिन्न के क्रमिक पट्टधर, गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छनायक आ.भ.श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म. आदि ठाणा-11 का 1 अप्रैल 2017 को सुबह 7:30बजे निराला बाजार से प्रवेश प्रारम्भ हुआ।
श्री गोड़ी जी पार्श्वनाथ जिनमंदिर में चतुर्विध श्रीसंघ ने दर्शन वन्दन किये। सामूहिक भक्तामर तथा शक्रस्तव का पाठ हुआ। साधारण भवन में मंगल प्रवचन हुआ।
 मुनि श्री मोक्षानन्द विजय जी म.सा ने फ़रमाया कि भले हम पीली और सफेद चादर में दिखाई दे रहे हैं, किंतु हमारी गुरु परम्परा एक है। हम गुरु आत्म के परिवार के सदस्य हैं। धाराएं दो हैं किंतु मूल एक है।

गुरु आत्म के बाद उनके परिवार में समय समय पर कई समुदाय बने, परंतु सभी की आत्मा गुरु आत्म है।

एक वृक्ष की अनेक शाखाएं हैं और सभी मूल से ही जुडी होती हैं । मूल पर एक का अधिकार कभी किसी का नही हुआ न ही हो सकता है।
 आ.श्री यशोवर्म सूरि जी म.सा ने फ़रमाया कि हमारी गुरु परंपरा एक है, आज समय एक होने का है। भ. महावीर के परिवार में सभी सम्प्रदाय अपनी अपनी परंपरा में रह कर महावीर के पथ पर चलें न कि दूसरों के राह में पत्थर फेंक कर अपनी तुच्छ मनोवृत्ति प्रस्तुत करें।

ग. आ. श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरि जी म.सा ने फ़रमाया कि आज पूज्य श्री का 52 वर्षों बाद और मेरा 30 वर्षों बाद औरंगाबाद आना हुआ है । गत वर्ष पालीताना के श्रमण सम्मेलन में हमारा मिलना हुआ । आज पुनः एक वर्ष बाद यहां मिले । प्रभु महावीर के मार्ग पर वोही चल सकता है जो दूसरों को साथ लेकर चल सकता है। मात्र अपने सम्प्रदाय, गच्छ या समुदाय के लिए जीने वाले कभी महावीर के मार्ग को पा नही सकते।

 संघ की और से काम्बली ओढ़ाई गयी।

चारों सम्प्रदाओं के पदाधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे और प्रभु महावीर जन्म कल्याणक की निमंत्रण पत्रिका का विमोचन किया गया।

बाल मुनि श्री मोक्षेश विजय जी म. सा के दीक्षा पश्चात प्रथम बार अपने सांसारिक माता पिता के घर पधारने का प्रसंग भी था तो उनकी और से भी सकल संघ को शाम को वालुज की और उनके निवास स्थान पर आने की विनती की गई।

इस अवसर पर अम्बाला, हैदराबाद, पुणे, मुम्बई, ठाणा, सूरत, जालना से संघों संस्थाओं के पदाधिकारी तथा गुरु भक्त बड़ी संख्या में पधारे हुए थे ।

सकल संघ के अल्पाहार का लाभ गुरुभक्त चैंपियन परिवार ने लिया। जिन्होंने 30 वर्ष पहले गुरु इंद्र की निश्रा में अंतरिक्ष पार्श्वनाथ तीर्थ का ऐतिहासिक छ री पालित यात्रा संघ निकाला था।                        

Friday, 31 March 2017

गुरु आत्म के पाट परंपरा की दो धाराओं का एक साथ प्रवेश

गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छनायक एवं आ.श्री लब्धि सूरि समुदाय के प्रभावक आचार्य भगवंतों का औरंगाबाद में होगा एक साथ प्रवेश

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1 अप्रैल शनिवार को औरंगाबाद में गुरु आत्म की दो पाट परंपरा के प्रभावक आचार्य भगवंतों का एक साथ मंगल प्रवेश का दृश्य संयोजित होने जा रहा है।

श्री आत्म कमल लब्धि विक्रम पाट परंपरा के शासन प्रभावक परम पूज्य आ.भ. श्रीमद् विजय यशोवर्म सूरि जी म.सा आदि श्रमण - श्रमणी ठाणा - 32 एवं

भ. श्री महावीर स्वामी के 77वें व श्री आत्म वल्लभ समुद्र इंद्र पाट परंपरा* के क्रमिक पट्टधर, गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छाधिपति शांतिदूत आ.भ.श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म.सा. आदि ठाणा का औरंगाबाद नगर में एक साथ प्रवेश होगा।

गुरु आत्म की इन दो पाट परंपरा के प्रभावक पूज्यों के एक साथ प्रवेश की तैयारियों में औरंगाबाद संघ दिलो जान से जुटा हुआ है।

आ.श्री यशोवर्म सूरि जी म.सा मालेगांव की और से विहार करते हुए तथा ग. आ.श्री नित्यानंद सूरि जी म. सा आदि श्रमण श्रमणी ठाणा - 11 हैदराबाद की और से विहार करते हुए 1 अप्रैल को औरंगाबाद पहुँच रहें हैं।

ज्ञात रहे कि गुरु आत्म के कालधर्म के पश्चात् अनेक पाट परंपरा प्रचलित हुई और सभी अपने मूल आत्माराम जी से जुड़ कर गुरु परंपरा का निर्वाह कर शासन की प्रभावना कर रहे हैं।

पालीताना आयोजित तपागच्छिय श्रमण सम्मेलन के बाद यहां पर एक वर्ष के बाद दोनों धाराओं का प्रेमपूर्ण मिलन होगा।

सब का मूल एक है।
सबकी आत्मा आत्म है।

Wednesday, 29 March 2017

प्रथम बार महाराष्ट्र के वाहे गांव में जैन संतों का हुआ आगमन

सम्पूर्ण देश में विचरण कर जिनशासन की अपूर्व सेवा और प्रभावना करने वाले भगवान महावीर की अक्षुण्ण पाट परंपरा के 77वें पट्टधर, पंजाब केसरी गुरु वल्लभ के समुदाय के वर्तमान गच्छनायक शांतिदूत आचार्य देव श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म.साआदि श्रमण श्रमणी वृन्द महाराष्ट्र में औरंगाबाद की और विहार में आगे बढ़ रहे हैं। 28 मार्च को गुरुदेव वाहे गाँव पधारे। गच्छनायक गुरुदेव के शिष्य मुनि श्री मोक्षानंद विजय जी म. के शिष्य बालमुनि श्री मोक्षेश विजय जी म. का ये सांसारिक पैतृक गांव हैं। इस गाँव में आज तक किसी जैन संतों का पधारना नही हुआ।
 किंतु आज गांववासी उस बालमुनि को देखने के लिए उत्सुक थे जिसका सम्बन्ध इस भूमि से जुड़ा हुआ था। बालमुनि और उनके सांसारिक पारिवारिकजन भी अत्यंत हर्षित थे क्योंकि गुड़ी पड़वा यानि नव वर्ष के दिन अपने दादा गुरु जी, गुरु जी और अन्य साधु साध्वीवृन्द सहित दीक्षा के बाद प्रथम बार पैतृक गांव में पधारना हो रहा था।
गाँव में रहने वाले सभी धर्म जाति के लोग जैन संतों को निहारने और स्वागत करने के लिए सुबह से ही अपलक पांवड़े बिछा कर प्रतीक्षा कर रहे थे।
गुरुदेव ने कहा कि धन्य हुआ ये गांव और यहां की भूमि जहाँ पर आज संत पधारे हैं। जहां संतो ने चरण न पड़ें वो स्थान श्मशान के समान हैं और जिस भूमि पर संत पधारें वो भूमि पवित्र तीर्थ बन जाती है।
गुरुदेव ने गांव वासियों को शाकाहार अपनाने और मद्यपान, व्यसन आदि त्याग करने की प्रेरणा दी। गुरुदेव ने कहा कि बालमुनि का अपने सांसारिक पैतृक गांव में अनायास आगमन एक संयोग ही है। परिवारिकजनों ने पारंपरिक रीति से संतों का स्वागत किया और काम्बली ओढ़ाई। पगलिया करवाया।

Saturday, 25 March 2017

वल्लभ वाटिका बुलेटिन

🔆 वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी आदि ठाणा 7 एवं साध्वी पूर्णप्रज्ञा श्री जी आदि ठाणा 4 दिनांक 1 अप्रैल 2017 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में विराजमान रहेंगे।

🔆 तपसूर्य आचार्य विजय वसंत सूरीश्वर जी आदि ठाणा 2 विजय वल्लभ स्मारक, दिल्ली में विराजमान हैं। गुरुदेव के अखण्ड 49वें वर्षीतप का पारणा अक्षय तृतीया 29 अप्रैल 2017 को हस्तिनापुर की भूमि पर होगा।

🔆 ज्योतिष विशारद आचार्य विजय यशोभद्र सूरीश्वर जी आदि ठाणा 2 गुजरात में अहमदाबाद से मेहसाणा की ओर विहार में हैं।

🔆 ज्ञानप्रभाकर आचार्य विजय जयानंद सूरीश्वर जी आदि ठाणा 3 बीकानेर क्षेत्र में विराजमान हैं। कल गुरुदेव का भव्य नगर प्रवेश बीकानेर में होगा। मुनि जयकीर्ति विजय जी की जन्मभूमि भी बीकानेर ही है।

🔆 पंन्यास चिदानंद विजय जी, मुनि लक्ष्मीचंद्र विजय जी आदि ठाणा ध्यान साधना के उद्देश्य से आचार्य विजय जनकचन्द्र सूरि जी की कालधर्म भूमि - ईडर (गुजरात) में विराजमान हैं।

🔆 कार्यदक्ष गणि राजेंद्र विजय जी, मुनि धरणेन्द्र विजय जी आदि ठाणा गुरु वल्लभ जन्मभूमि - बड़ौदा (गुजरात) में विराजमान हैं।

🔆 हस्तरेखा-ज्ञाता पंन्यास धर्मशील विजय जी, मुनिराज रविंद्र विजय जी आदि ठाणा 3 की निश्रा में ओली की आराधना बोडेली (गुजरात) में करवाई जाएगी।

🔆 जैनसाइटप्रणेता मुनि भाग्यचंद्र विजय जी आदि ठाणा 2 एवं साध्वी शीलधर्मा श्री जी आदि ठाणा 4 की निश्रा में चेन्नई के समीपवर्ती आत्म वल्लभ नगर, नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ, तन्डलम में 3 से 11 अप्रैल 2017 को चैत्र मास की नवपद ओली की आराधना करवाई जाएगी।

🔆 संयम स्थविरा साध्वी देवेंद्र श्री जी, साध्वी शासनज्योति श्री जी आदि ठाणा मेवाड़ क्षेत्र के अंटाली तीर्थ में आचार्य पुण्यरत्न सूरीश्वर जी के सानिध्य में होने जा रहे प्रतिष्ठा महोत्सव में उपस्थित रहेंगी। 15 दिन महोत्सव पूर्वक 20 अप्रैल 2017 को यह प्रतिष्ठा संपन्न होगी।

🔆 शासनरत्ना साध्वी प्रगुणा श्री जी, साध्वी प्रियधर्मा श्रीजी आदि ठाणा 4 बड़ौत क्षेत्र में धर्मस्पर्शना करते हुए कल्याणक भूमि - श्री हस्तिनापुर महातीर्थ पधारे हैं एवं यहाँ स्थिरता करेंगे।

🔆 सरल स्वभावी साध्वी चन्दनबाला श्री जी, साध्वी धर्मरत्ना श्री जी आदि ठाणा बोडेली से विहार कर भगवानपुरा आदि क्षेत्रों की स्पर्शना करते हुए पिपारिया (जिला बड़ौदा) गुजरात पधारे एवं कुछ दिन की स्थिरता करेंगे।

🔆 सरल स्वभावी साध्वी यशोभद्रा श्री जी, साध्वी प्रीतिदर्शिता श्री जी आदि ठाणा पटियाला (पंजाब) में विराजमान हैं। साध्वीद्वय का आगामी चातुर्मास होशियारपुर में होगा।

🔆 विदुषी साध्वी चंद्रयशा श्री जी, साध्वी पुनीतयशा श्री जी आदि ठाणा श्री विमलनाथ जी की कल्याणक भूमि - कम्पिलपुरी (उत्तर प्रदेश) में विराजमान हैं एवं साध्वी जी की निश्रा में आगामी माह शाश्वती नवपद ओली की भव्य आराधना भी करवाई जाएगी।

Thursday, 23 March 2017

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

चैत्र वदि दशमी गोडवाड़ भूषण, स्वर्ण संत, भोले बाबा आचार्य देव श्रीमद् विजय जयानंद सूरि जी महाराज साहिब के 64वें जन्मदिवस पर वल्लभ वाटिका एडमिन टीम एवं समस्त गुरुभक्तों की और से हार्दिक शुभकामना एवं कोटि कोटि वंदन, आप श्री जी ऐसे ही संयम पथ पर आगे बढ़ते हुए जिनशासन के कार्यों को बढ़ चढ़ कर करते रहे, शासनदेव से ऐसी मंगल प्रार्थना 

Tuesday, 21 March 2017

*वल्लभ वाटिका नित्य विहार दर्शन*
★★★★★★★★★★★★★★★

*दक्षिण से उत्तर भारत* की और बढ़ते हुए अनेक राज्यों में धर्म प्रभावना तथा शासन सेवा के कार्यों का कीर्तिमान स्थापित करते हुए *पंजाब केसरी गुरु वल्लभ समुदाय के गच्छाधिपति आचार्य देव श्रीमद् विजय नित्यानन्द सूरि जी म. सा.आदि ठाणा* ने आज कर्नाटक राज्य की सीमा पूरी की और महाराष्ट्र में प्रवेश किया ।

*लातूर जैन श्रीसंघ की विनंती पर पूज्य गुरुदेव 24 मार्च को सुबह लातूर पधारेंगे।*